लम्हा लम्हा फिकर यही है वो लम्हे कब आएंगे लम्हा लम्हा फिकर यही है वो लम्हे कब आएंगे-2 नाते नबी जब पढ़ते हुए जब शहर ए मदीना जायेंगे लम्हा लम्हा फिकर यही है वो लम्हे कब आएंगे एक दिन तैबा की गलियों में हम ऐसे खो जायेंगे -2 खुल्द बरी के रहने वाले ढूढ़ने हमको आएंगे लम्हा लम्हा फिकर यही है वो लम्हे कब आएंगे-२ चाँद सितारे फूल काली सब, एक से एक हसीं है मगर-2 हुश्न ए मोहम्मद के जलवों की बात कहाँ से लाएंगे लम्हा लम्हा फिकर यही है वो लम्हे कब आएंगे-2 इश्क़ ए नबी पर नाज़ है हमको ज़ाहिद तुझको सज़दों पर-2 इंशा अल्लाह तुझसे पहले जन्नत में हम जायेगे-2 लम्हा लम्हा फिकर यही है वो लम्हे कब आएंगे-2 आप बुलाएँगे जब दर पर आपकी चाहत के ये असीर-2 दुनिया की हर एक ख़ुशी को ठुकरा कर आ जायेंगे लम्हा लम्हा फिकर यही है वो लम्हे कब आएंगे-2 नाते नबी जब पढ़ते हुए जब शहर ए मदीना जायेंगे
मरहबा या मुस्तफा , मरहबा या मुस्तफा ,----- 2 मरहबा या मुस्तफा , मरहबा या मुस्तफा ,---- 2 नसीब चमके हैं परशियों के ,------ 2 के अर्श पे चाँद आ रहे हैं ,----- 2 झलक से जिनकी फ़लक हैं रोशन ,----2 ( झलक से जिनकी फ़लक हैं रोशन) वो शम्स तशरीफ़ ला रहे हैं ,---- 2 मरहबा या मुस्तफा , मरहबा या मुस्तफा ,----- 2 मरहबा या मुस्तफा , मरहबा या मुस्तफा ,---- 2 निशार तेरी चहल पहल पे ,------ 2 हज़ारों ईदे रबी उल अव्वल ,------ 2 ( हज़ारों ईदे रबी उल अव्वल) शिवाय इब्लीस के जहाँ में ,----- 2 सभी तो खुशियां मना रहे हैं ,----- 2 मरहबा या मुस्तफा , मरहबा या मुस्तफा ,----- 2 मरहबा या मुस्तफा , मरहबा या मुस्तफा ,---- 2 शबे विलादत में सब मुसलमां ,----- 2 न क्यों करें जान ओ माल क़ुर्बा ,----- 2 ( न क्यों करें जान ओ माल क़ुर्बा) अबू लहब जैसे सख्त क़ाफ़िर ,----- 2 ख़ुशी में जब फैज़ पा रहे हैं ,------ 2 मरहबा या मुस्तफा , मरहबा या मुस्तफा ,----- 2 मरहबा या मुस्त...