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sher

HAR MEEL KE PATHTHAR PAR YE IBARAT LIKH DO
NAPAAK IRADO,N SE MANZIL NAHI,N MILTI

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  मरहबा या मुस्तफा , मरहबा या मुस्तफा ,----- 2 मरहबा या मुस्तफा , मरहबा या मुस्तफा ,---- 2 नसीब चमके हैं परशियों के ,------ 2 के अर्श पे चाँद आ रहे हैं ,----- 2 झलक से जिनकी फ़लक हैं रोशन ,----2   ( झलक से जिनकी फ़लक हैं रोशन) वो शम्स तशरीफ़ ला रहे हैं ,---- 2 मरहबा या मुस्तफा , मरहबा या मुस्तफा ,----- 2 मरहबा या मुस्तफा , मरहबा या मुस्तफा ,---- 2 निशार तेरी चहल पहल पे ,------ 2 हज़ारों ईदे रबी उल अव्वल ,------ 2    ( हज़ारों ईदे रबी उल अव्वल) शिवाय इब्लीस के जहाँ में ,----- 2 सभी तो खुशियां मना रहे हैं ,----- 2 मरहबा या मुस्तफा , मरहबा या मुस्तफा ,----- 2 मरहबा या मुस्तफा , मरहबा या मुस्तफा ,---- 2 शबे विलादत में सब मुसलमां ,----- 2 न क्यों करें जान ओ माल क़ुर्बा ,----- 2    ( न क्यों करें जान ओ माल क़ुर्बा) अबू लहब जैसे सख्त क़ाफ़िर ,----- 2 ख़ुशी में जब फैज़ पा रहे हैं ,------ 2 मरहबा या मुस्तफा , मरहबा या मुस्तफा ,----- 2 मरहबा या मुस्त...
  जिधर जिधर से भी गुजरे है मुस्तफा वाले - जिधर   जिधर   से   भी   गुजरे   है   मुस्तफा   वाले   ज़माना देखके बोले है अय खुदा वाले-2 दिलों में आज भी नामे हुसैन रोशन है यज़ीद मर गया ज़िंदा हैं कर्बला वाले जिधर   जिधर   से   भी   गुजरे   है   मुस्तफा   वाले   लबों पे जिनके दुरूदो सलाम आएगा - लबों   पे   जिनके   दुरूदो   सलाम   आएगा  - उसी के वास्ते कौसर का जाम आएगा- उसी   के   वास्ते   कौसर   का   जाम   आएगा- बहोत सम्हाल के रखना नबी के दीवानों यही वज़ीफ़ा क़यामत में काम आएगा - 2- लबों पे जिनके --- रज़ा ये रब के लिए दीन की बक़ा के लिए-2 चले हुसैन मदीने से कर्बला के लिए-2 ज़मीन तुझको उसी वक़्त खा गयी होती हुसैन हाथ उठाते अगर दुआ के लिए -2 - रज़ा ये रब -- ग़ौस ख्वाजा के वफादार यहाँ आये हैं-2 आशिक़े अहमदे मुख़्तार यहाँ आये हैं-2 कैसे कोई मेरे आक़ा ...
  सब से औला व आ ’ ला हमारा नबी सब से औला व आ ’ ला हमारा नबी सब से बाला व वाला हमारा नबी अपने मौला का प्यारा हमारा नबी दोनों आलम का दूल्हा हमारा नबी बज़्मे आख़िर का शम्अ़ फ़रोज़ां हुआ नूरे अव्वल का जल्वा हमारा नबी जिस को शायां है अ़र्शे ख़ुदा पर जुलूस है वोह सुल्त़ाने वाला हमारा नबी बुझ गईं जिस के आगे सभी मश्अ़लें शम्अ़ वोह ले कर आया हमारा नबी जिस के तल्वों का धोवन है आबे ह़यात है वोह जाने मसीह़ा हमारा नबी अ़र्शो कुरसी की थीं आईना बन्दियां सूए ह़क़ जब सिधारा हमारा नबी ख़ल्क़ से औलिया औलिया से रुसुल और रसूलों से आ ’ ला हमारा नबी ह़ुस्न खाता है जिस के नमक की क़सम वोह मलीह़े दिलआरा हमारा नबी ज़िक्र सब फीके जब तक न मज़्कूर हो न - मकीं ह़ुस्न वाला हमारा नबी जिस की दो बूंद हैं कौसरो सल - सबील है वोह रह़मत की दरिया हमारा नबी जैसे सब का ख़ुदा एक है वैसे ही इन का उन का तुम्हारा हमारा नबी क़रनों बदली रसूलों की होती रही चांद ...