मुस्तफा जाने रहमत पे लाखों सलाम। शमए बज्मे हिदायत पे लाखों सलाम।
शहरे यारे इरम ताजदारे हरम। नौ बहारे शफाअत पे लाखों सलाम।
शबे असरा के दुल्हा पे लाखों सलाम। नो शए बज्में जन्नत पे लाखों सलाम।
हम गरीबों के आका पे बेहद दरुद। हम फकीरों के सरवत पे लाखों सलाम।
जिस सुहानी घड़ी चमका तैबा का चाँद। उस दिल अफरोजे साअत पे लाखों सलाम।
पहले सजदे पे रौजे अजल से दरुद। याद गारिये उम्मत पे लाखों सलाम।
जिस तरफ उठ गई दम आ गया। उस निगाहे इनायत पे लाखों सलाम।
जिससे तारीक दिल जगमगाने लगे। उस चमक वाली रंगत पे लाखों सलाम।
पतली पतली गुले कुद्स की पत्तियाँ। उन लबों की नजाकत पे लाखों सलाम।
वह ज़बाँ जिसको सब कुन की कुन्जी कहे। उसकी नाफिज़ हुकूमत पे लाखो सलाम।
जिसकी तस्की पे रोते हुए हंस पड़। उस तबस्सुम की आदत पे लाखों सलाम।
हाथ जिस सम्त उठा गनी कर दिया। मौजे बहरे सखावत पे लाखों सलाम।
जिसको बारे दो आलम की परवाह नहीं। ऐसे बाजू की कुव्वत पे लाखों सलाम।
नूर के चश्मे लहराए दरया बहे। उंगलियों की करामत पे लाखों सलाम।
खाई कुरआँ ने खाके गुज़र की कसम। उस कफे पा की हुरमत पे लाखों सलाम।
उनके मौला के उन पर करोड़ो दरुद। उनके असहाब व इज्जत पे लाखों सलाम।
कर्बला की जमी और इमाम हुसैन। उस शहीदे मोहब्बत पे लाखों सलाम।
मुस्तफा जाने रहमत पे लाखों सलाम। शमए बज्मे हिदायत पे लाखों सलाम।
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