घर घर उजाला बा तोहरे घर से
अंगना मा आक़ा तोहरे नूर बरसे -3
घर घर उजाला बा तोहरे घर से-2
अंगना
मा
आक़ा
तोहरे
नूर
बरसे-2
आक़ा
क़यामत
की
गर्मी
पडत
बा-2
धूप से सारा बदनवा जलत बा -2
चादर
हटईया
न
मोरे
सर
से
अंगना
मा
आक़ा
तोहरे
नूर
बरसे-2
गार सोर में जब बंद भइलन सुरखवा
डस
कर
के
सिद्दीक
से
कहे
लागल
संपवा
चरना
हटावा
आक़ा
नैना
तरसे
अंगना
मा
आक़ा
तोहरे
नूर
बरसे
-३
जाइके मदीने में कहेना बयरिया
अब
तो
बुलालो
आक़ा
तैबा
नगरिया
अब
मोरी
अखियन
से
सावन
बरसे
अंगना
मा
आक़ा
तोहरे
नूर
बरसे
-3
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