गूंज उठी सदाए मरहबा आ गए हुज़ूर आ गए,
जश्ने ईद ए बारहबी मना आ गए हुज़ूर आ गए।
गूंज उठी सदाए मरहबा आ गए हुज़ूर आ गए,
थरथराने कांपने लगा चीख उठे पुजारी क्या हुआ,
बुत ये कह के सजदे में गिरा आ गए हुज़ूर आ गए।
गूंज उठी सदाए मरहबा आ गए हुज़ूर आ गए,
अ़र्श-फ़र्श की थी गुफ्तगू मैं बड़ा हूं या बड़ा है तू,
फ़र्श बोला अब मैं हूं बड़ा आ गए हुज़ूर आ गए।
गूंज उठी सदाए मरहबा आ गए हुज़ूर आ गए,
मारी जा चुकी हो बेटियों अब वक़ारो फ़ख़र् से जियो,
कट चुका है पंजा-ए-जफ़ा आ गये हुज़ूर आ गये।
गूंज उठी सदाए मरहबा आ गए हुज़ूर आ गए,
बकरी बोली हम भी शेर हैं यानी आज से दिलेर हैं,
दौरे क़त्ल ख़ून लद गया आ गये हुज़ूर आ गये।
गूंज उठी सदाए मरहबा आ गए हुज़ूर आ गए,
जश्ने ईद ए बारहबी मना आ गए हुज़ूर आ गए।
गूंज उठी सदाए मरहबा आ गए हुज़ूर आ गए,
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